मन और दिमाग में क्या फर्क है
शरीर मन का प्रतिबिम्ब है. हमारे शरीर पर भोजन से अधिक मन का प्रभाव पड़ता है. पर-दोष देखना,कहना,बताना,क्रोध, अहंकार,दूसरो से द्वेष और उनको गन्दे समझना या (हेट्रेड ) करना, इन सबका सीधे आपके शरीर पर पूरा प्रभाव अवश्य पड़ता है। निसंदेह !\\जानकारो का विचार है, मन के संतुलन बिगड़ने पर, अनिद्रा, सिरदर्द , मोटापा, पेट सम्बंधी रोग हो जाते है। शरीर एवम अपने विचारो को आप निम्न-लिखित तरीके से ठीक कर सकते है। निस्वार्थ सेवा , क्षमा और प्यार प्रव़ति , ध्यान, सकारात्मक विचार और बाहिर-मुखी प्रव़ति का त्याग !* आप अपनी आय से समर्थ्या-नुसार--- भगवत----सेवा मे--- अर्पण करते रहना ! शरीर और मन को स्वस्थ करने मे सबसे महत्वा=पूर्ण साधन, प्रेम से घर वालो, दूसरो की, निस्वार्थ- भाव से , बिना अहँकार ,सब कुछ करते रहना , मनन करे.इससे आपको रोग-मुक्ति , तनाव पर नियंत्रण , बुढापे से शरीर में होने वाले परिवर्तन में कमी , रचना-त्मक कार्य वास्ते - आत्मिक- शक्ति प्राप्ति . आमतौर से स्वार्थी , अहंकारी व्यक्ति हृदय रोग , कॅन्सर और पुराने रोगो.से पीड़ित होते है। . यही कारण है के मनुष्या क...