संदेश

मार्च, 2018 की पोस्ट दिखाई जा रही हैं

मन और दिमाग में क्या फर्क है

शरीर मन का प्रतिबिम्ब है.  हमारे शरीर पर भोजन से अधिक मन का प्रभाव पड़ता है. पर-दोष देखना,कहना,बताना,क्रोध, अहंकार,दूसरो से द्वेष और उनको गन्दे समझना या (हेट्रेड ) करना, इन सबका सीधे आपके शरीर पर पूरा प्रभाव अवश्य पड़ता है। निसंदेह !\\जानकारो का विचार है, मन के संतुलन बिगड़ने पर, अनिद्रा, सिरदर्द , मोटापा, पेट सम्बंधी रोग हो जाते है।  शरीर एवम अपने विचारो को आप निम्न-लिखित तरीके से ठीक कर सकते है।   निस्वार्थ सेवा , क्षमा और प्यार प्रव़ति , ध्यान, सकारात्मक विचार और बाहिर-मुखी प्रव़ति का त्याग !* आप अपनी आय से समर्थ्या-नुसार--- भगवत----सेवा मे--- अर्पण करते रहना !  शरीर और मन को स्वस्थ करने मे सबसे महत्वा=पूर्ण साधन, प्रेम से घर वालो, दूसरो की, निस्वार्थ- भाव से , बिना अहँकार ,सब कुछ करते रहना , मनन करे.इससे आपको रोग-मुक्ति , तनाव पर नियंत्रण , बुढापे से शरीर में होने वाले परिवर्तन में कमी , रचना-त्मक कार्य वास्ते - आत्मिक- शक्ति प्राप्ति . आमतौर से स्वार्थी , अहंकारी व्यक्ति हृदय रोग , कॅन्सर और पुराने रोगो.से पीड़ित होते है। . यही कारण है के मनुष्या क...